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मिर्जापुर में कानून का मजाक: किसान पर जानलेवा हमला, पुलिस बनी मूकदर्शक या दलाल?"

मिर्जापुर में कानून का मजाक: किसान पर जानलेवा हमला, पुलिस बनी मूकदर्शक या दलाल?"

मिर्जापुर के कछवा थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना ने यूपी की कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी है। एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहते हैं, "यूपी में कानून का राज है," तो दूसरी तरफ यहां के किसान अभिषेक कुमार द्विवेदी को खेत में घुसकर बेरहमी से पीटा जाता है, और पुलिस अपनी कुर्सियों पर चैन से बैठी रहती है। "जागते रहो" का नारा देने वाली पुलिस यहां सोती रही, और परिणामस्वरूप किसान की जान पर बन आई!

 !जबरन कब्जा और खूनी खेल: पुलिस को पहले से थी खबर, पर कार्रवाई जीरो!

26 जुलाई को अभिषेक कुमार पर खेत में हमला हुआ, लेकिन ये हमला अचानक नहीं था। अभिषेक ने पहले ही पुलिस को सूचना दे दी थी कि उनके खेत में फसल काटने की साजिश रची जा रही है। पुलिस को जैसे सांप सूंघ गया, उसने न तो समय पर कदम उठाया और न ही किसी प्रकार की सुरक्षा प्रदान की। जब लाठियां चल रही थीं, तब पुलिस थाने में अपनी आंखें मूंदे बैठी रही, जैसे कह रही हो, “देखो, पर कुछ मत करो।” 

यहाँ सवाल यह उठता है—क्या पुलिस की यही भूमिका है? क्या पुलिस का काम सिर्फ तमाशबीन बनकर देखना है, जब लोगों पर जानलेवा हमले हो रहे हों?

 “दावा कानून का, हकीकत दलाली की”: पुलिस की भूमिका पर गंभीर आरोप"

पीड़ित अभिषेक ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि पुलिस ने जानबूझकर केस की धाराएं हल्की कर दीं, ताकि आरोपी बच निकले। मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और जमीन पर पड़ी खून की निशानियां भी पुलिस के लिए कोई मायने नहीं रखतीं। पुलिस का रवैया ऐसा था, जैसे वह आरोपी पक्ष से मिली हो। "जिस थाली में खाया, उसी में छेद किया,"—यही कहावत पुलिस के काम पर सटीक बैठती है। न्याय दिलाने का दावा करने वाली पुलिस खुद इस मामले में ‘दलाली’ करती दिख रही है।

 मुख्यमंत्री के दावे हवा में: "कानून का राज" या "अन्याय का नाच"?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बड़े-बड़े मंचों से यह कहते हैं कि यूपी में कानून-व्यवस्था सबसे बेहतर है। लेकिन मिर्जापुर की यह घटना उनकी सरकार के इन दावों का मजाक बना रही है। "ऊपर से शेर, अंदर से ढेर"— ऐसा ही कुछ हाल यहां की पुलिस का दिख रहा है। एक तरफ किसानों पर हमले हो रहे हैं, दूसरी तरफ पुलिस एफआईआर में सिर्फ मामूली धाराएं जोड़कर अपना पल्ला झाड़ रही है। 

यहां सवाल यह है कि क्या योगी सरकार के कानून का राज सिर्फ भाषणों में है? जब किसानों की फसलें लूटी जा रही हैं और उनकी जान पर बन रही है, तब कानून की किताबें थानों में धूल खा रही हैं।

 "खेल बड़ा है, और पुलिस सिर्फ प्यादा": जमीन कब्जा माफिया और पुलिस की यारी?

मामला सिर्फ एक खेत का नहीं, बल्कि पुलिस और जमीन कब्जा माफिया की मिलीभगत का भी है। किसानों से जमीन छीनने का खेल लंबे समय से जारी है, और पुलिस इसमें मुख्य किरदार निभा रही है। अभिषेक के आरोप बताते हैं कि कैसे पुलिस ने जानबूझकर उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया और हमलावरों को खुली छूट दी। 

"मुंह में राम, बगल में छुरी"— पुलिस का यह रवैया दिखाता है कि उसे न्याय की कोई परवाह नहीं, बल्कि वह सिर्फ अपने ‘स्वार्थ’ की रोटी सेंकने में लगी है।

 न्याय की उम्मीद कम, दलाली का खेल ज्यादा

अभिषेक का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान होने के बावजूद पुलिस ने गंभीर धाराएं नहीं लगाईं। "आम आदमी की आवाज़ हमेशा दबा दी जाती है,"—यह घटना इस कहावत को फिर से सच साबित करती है। क्या न्याय का अधिकार सिर्फ अमीरों और ताकतवरों के लिए है? मिर्जापुर के किसान को न्याय पाने के लिए पुलिस, प्रशासन और पूरे सिस्टम से लड़ाई लड़नी पड़ रही है, जो कहीं न कहीं सरकार की नाकामी का प्रतीक है।

पुलिस का ‘मूकदर्शक’ से ‘साथी’ बनने का सफर

मिर्जापुर की इस घटना ने साफ दिखा दिया है कि पुलिस की निष्क्रियता सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक गहरे षड्यंत्र का हिस्सा है। एक किसान जिसने अपनी फसल बचाने की कोशिश की, आज न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। 

तो क्या यूपी में न्याय सिर्फ 'भाषणों' में मिलेगा, या आम आदमी के लिए भी कभी इंसाफ की कोई उम्मीद होगी? अब वक्त आ गया है कि जनता आवाज उठाए, क्योंकि "जब जनता उठती है, तो तख्त और ताज हिल जाते हैं।"

"जागो, मिर्जापुर की आवाज़ सुनो!"
*कलश यात्रा के साथ हुआ संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ

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............ चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ के चारों पुत्रों की बारात वैभव से परिपूर्ण धूमधाम से बारात निकली रामलीला स्टेज से निकली श्रीराम बारात बाजार में परिभ्रमण किया ड्रामड गंज चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ के चारों पुत्रों की बारात वैभवपूर्ण धूमधाम से पूरी शान से बारात निकली और बाजार में क्षेत्र के नागरिक बाराती के रूप में शामिल रहे चारों तरफ धूम रही सड़क के दोनों पटरियों पर क्षेत्र की महिलाएं और बच्चे ब्रह्मांड नायक श्री राम के जय घोष करती रहे ज्ञात हो इसके पूर्व परशुराम और लक्ष्मण का संवाद हुआ तत्पश्चात दूत द्वारा राजा दशरथ को ज्ञात हुआ कि उनके पुत्र का विवाह जनक राज की पुत्री जानकी से निश्चित हुआ है रामलीला स्टेट से श्री राम की बारात निकाली गई जिसमें सैकड़ो लोग शामिल हुए बारात भ्रमण करते हुए रामलीला मैदान में पहुंचा जहां पर सीताराम मांडवी भरत उर्मिला लक्ष्मण श्रुतिकृति शत्रुघ्न का एक ही समय में विवाह हुआ उक्त अवसर पर रामलीला अध्यक्ष अंजनी कुमार सोनी लव कुश केसरी तारकेश्वर केसरी ओंकार केसरी विजय पाल अनिल कुमार कृष्ण गोपाल बसंत लाल सहित कमेटी के पदाधिकारी एवं सदस्य शामिल रहे परशुराम लक्ष्मण संवाद के बाद सीताराम विवाह का मंचन हुआ। रामलीला स्टेज से श्रीराम की बारात निकाली गई। महाराजा दशरथ अयोध्या से बारात लेकर जनकपुर पहुंचे। बारात में सैंकड़ों लोग शामिल हुए। बारात नगर भ्रमण करते हुए पुनः रामलीला मैदान में पहुंचा। सीताराम,माण्डवीभरत, उर्मिला लक्ष्मण, एवं श्रुतिकीर्ति शत्रुघ्न का एक ही समय में विवाह हुआ । उक्त अवसर पर रामलीला अध्यक्ष अंजनी कुमार सोनी, लवकुश केशरी, ओमकार केशरी, अनिल केशरी, विजय पाल, कृष्ण गोपाल, बसंतलाल, तारकेश्वर सहित श्रीरामलीला कमेटी पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे।

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